
ग्रेटर नोएडा। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में शनिवार को दुनिया की कमान जेन अल्फा के हाथों में नजर आई। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित ‘विकसित भारत मॉडल यूनाइटेड नेशंस में कक्षा 9 से 12 तक के 14 विद्यालयों के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भूमिका निभाते हुए वैश्विक व्यापार, विश्व अर्थव्यवस्था, तकनीक और बदलती वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए महज एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, वैश्विक व्यापार और नीति निर्माण की जटिलताओं को समझने का व्यावहारिक मंच भी बना। विद्यार्थियों ने संबंधित देशों की व्यापार नीतियों और वैश्विक मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण को समझते हुए अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर संवाद, तर्क-वितर्क व सहमति निर्माण की प्रक्रिया का अनुभव प्राप्त किया।

विकसित भारत 2047’ बना संवाद का केंद्र
मॉडल यूनाइटेड नेशंस का मुख्य विषय ‘विकसित भारत 2047’ रहा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को यह समझाना था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किस तरह काम करती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े निर्णय किस प्रकार देशों की अर्थव्यवस्था, उद्योग और आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करते हैं।विद्यार्थियों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक व्यापार व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। तकनीक और वैश्वीकरण के बढ़ते प्रभाव के बीच सप्लाई चेन मैनेजमेंट, ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट, डिजिटल ट्रेड पर मोरेटोरियम, रूल्स ऑफ ओरिजिन, ऑटोमेशन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ई-कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषय चर्चा के केंद्र में रहे।
दुनिया की अर्थव्यवस्था को समझा, देशों का पक्ष रखा
एमयूएन की विशेषता यह रही कि विद्यार्थियों को केवल किसी देश का प्रतिनिधि बनकर अपनी बात रखने तक सीमित नहीं रखा गया। उन्हें संबंधित देश की आर्थिक परिस्थितियों, व्यापार नीति और वैश्विक मुद्दों पर उसके रुख को समझने के बाद अपनी स्थिति प्रस्तुत करनी थी। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी मुद्दे पर निर्णय केवल एक देश के हित से नहीं, बल्कि अनेक देशों के हितों, आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक समीकरणों को ध्यान में रखकर प्रभावित होता है। तर्क, संवाद और कूटनीतिक तरीके से अपनी बात रखने की इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में पब्लिक स्पीकिंग, रिसर्च, क्रिटिकल थिंकिंग, नेगोशिएशन और निर्णय लेने की क्षमता को भी बढ़ावा दिया।