
ग्रेटर नोएडा । यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा दिन निर्यात उद्योग के लिए बेहद खास रहा। इस ट्रेड शो में निर्यातकों को मिले अच्छे ऑर्डर से करोबार को पंख लगेंगे। रविवार को केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी व कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने स्टॉलों पर सजे उत्पादों की बारीकियां परखी और जायजा लिया।
यूपीआईटीएस के तीसरे दिन स्पेशल बिजनेस सेशन लीवरेजिंग इंडियाज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स फॉर ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ सेशन आयोजित किया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई यात्रा तय की है। आज प्रदेश की सकारात्मक सोच, उद्यमियों का आत्मविश्वास और विकास के प्रति प्रतिबद्धता उसकी नई पहचान बन चुके हैं। प्रदेश के विकास की गूंज अब देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। उन्होंने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर शुरू हुआ यह आयोजन आने वाले वर्षों में और बड़ा व प्रभावी होता जाएगा। प्रदेश की विकास यात्रा को पूरी दुनिया एक उदाहरण के रूप में देखेगी। प्रदेश में निर्मित एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट, बड़े औद्योगिक पार्क व डिफेंस, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में हो रहा निवेश बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर प्रस्तुत करता है।

प्रदेश के स्थानीय ब्रांड और उत्पाद दुनिया के बाजारों में बना रहे अपनी पहचान
पीयूष गोयल ने कहा कि नोएडा के निकट तेजी से विकसित हो रही रोबोटिक्स फैक्ट्री इस बात का उदाहरण है कि उत्तर प्रदेश अब आधुनिक और उभरते हुए क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। प्रदेश के विकास की अगली कड़ी अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निर्यात, विदेशी निवेश और पर्यटन से जुड़ रही है। उत्तर प्रदेश के स्थानीय ब्रांड और उत्पाद दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के निर्यात को वर्ष 2030 तक पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य प्रदेश के बढ़ते आत्मविश्वास और आर्थिक क्षमता को दर्शाता है। केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से प्रदेश को विकास के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े लोगों का आह्वान किया कि वे इन अवसरों को पहचानें और पूरी ऊर्जा के साथ प्रदेश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाएं।
2017 से पहले के माहौल का किया उल्लेख
केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2017 के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और कारोबारी माहौल को लेकर लोगों में चिंता थी। उद्यमियों में पर्याप्त विश्वास नहीं था और प्रदेश में नए बड़े उद्योग लगाने को लेकर उत्साह का अभाव था। देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से भी प्रदेश की ओर निवेश के लिए देखने की स्थिति नहीं थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय निवेश की कल्पना और भी दूर की बात थी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के कारण आम लोगों के साथ-साथ व्यापार और उद्योग जगत में भी निराशा का माहौल था। बड़े पैमाने पर पलायन की चर्चा होती थी और उत्तर प्रदेश को पिछड़े राज्यों की श्रेणी में देखा जाता था। ऐसे वातावरण में रोबोटिक्स, डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश की कल्पना करना कठिन था।